स्वास्थ्य भवन से बच्चे के पिता के लिए एक गाड़ी भी भेजी गयी और रक्त की व्यवस्था की गई।
कोलकाता। पिता अपने 2 दिन के बच्चे के लिए ब्लड की तलाश कर रहा था। वह रात भर ब्लड की तलाश में शहर के इस छोर से दूसरे छोर तक भागता रहा, लेकिन उसे ब्लड नहीं मिला। यह तस्वीर बंगाल के स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। रविवार की रात 10 बजे से पिता बच्चे के खून की तलाश में जुट गया था। उन्होंने 9 ब्लड बैंकों का दौरा किया। पीलिया से पीडि़त बच्चे को ओ ग्रुप के ब्लड की आवश्यकता होती है, लेकिन ब्लड नहीं मिला। पिता बेबसी में लगभग रो रहा था। अपनी मजबूरी के बारे में बात कर रहा था। यह खबर सोमवार सुबह सामने आयी। 15 घंटे बाद आखिरकार पिता को अपने बेटे के लिए ब्लड मिल गया। जन्म के बाद नवजात पीलिया से ग्रसित है। वह फिलहाल बीसी रॉय चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में चिकित्साधीन है। उसका ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप है। यह ग्रुप वास्तव में एक दुर्लभ ब्लड ग्रुप होता है और बहुत ही कोशिश से मिलता है। बहुत कम लोगों के शरीर का रक्त इस ग्रुप का होता है।
इसी बीच, डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि बच्चे को ठीक करने के लिए खून की जरूरत है। पिता खून की तलाश में सड़क पर पर भटकता रहा। बच्चे के पिता अमीनुल इस्लाम के शब्दों में, मैं रविवार रात 10 बजे से ही रक्त की तलाश कर रहा हूं। डॉक्टरों का कहना है कि ब्लड की इमरजेंसी है। रक्त के बिना बच्चे को दौरे पड़ सकता है। मैं कई ब्लड बैंकों में गया लेकिन कहीं नहीं मिला। अमीनुल उत्तर 24 परगना जिले के बारासात के देगंगा का रहने वाला है। उनकी पत्नी ने पिछले शनिवार को बारासात अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया था। इसी बीच जन्म के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे को पीलिया हो गया है। ऐसे बच्चे को उच्च बुनियादी ढांचे वाले स्थानों में उपचार की आवश्यकता होती है। इसलिए बीसी रॉय अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। रविवार रात 9 बजे उन्हें वहां भर्ती कराया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि बच्चे को जल्द से जल्द 'ओÓ नेगेटिव ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाया जाए। बच्चे के पिता ने बताया, इसके बाद रात 10 बजे से सबसे पहले बीसी राय हॉस्पिटल के ब्लड बैंक। इसके बाद पिता सेंट्रल ब्लड बैंक, आरजी कोर, एनआरएस, पीजी, चितरंजन कैंसर अस्पताल, एमआर बांगुर अस्पताल समेत कई निजी अस्पतालों में गए, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। सोमवार की सुबह यह बात सामने आयी और मीडिया में खबर टेलीकॉस्ट होते ही स्वास्थ्य केंद्र सक्रिय हो गया। रक्त सेंट्रल ब्लड बैंक से खरीदा गया। स्वास्थ्य भवन से बच्चे के पिता के लिए एक गाड़ी भी भेजी गयी और रक्त की व्यवस्था की गई।